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भारतीय थल सेना में अफसर कैसे बनते हैं ताकतवर? जानें लेफ्टिनेंट से फील्ड मार्शल तक की रैंकिंग और उनकी जिम्मेदारियां
नई दिल्ली:
भारतीय थल सेना (Indian Army) का ढांचा अनुशासन, नेतृत्व और रणनीतिक कमान पर आधारित है। सेना में नए अधिकारी के प्रवेश से लेकर सर्वोच्च पद तक हर रैंक की एक स्पष्ट कमान और जिम्मेदारियां तय होती हैं। आइए समझते हैं सेना के शीर्ष 10 अधिकारी पदों का क्रम और उनकी भूमिकाएं:
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फील्ड मार्शल (Field Marshal): थल सेना की सर्वोच्च 5-स्टार मानद रैंक। यह नियमित कमान की सीढ़ी नहीं, बल्कि युद्धकाल में असाधारण व उत्कृष्ट सेवा के सम्मान में दी जाती है। (जैसे सैम मानेकशॉ और के.एम. करियप्पा)।
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जनरल (General): 4-स्टार रैंक, जो चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) के रूप में पूरी थल सेना का नेतृत्व करते हैं। देश की सैन्य रणनीति और ऑपरेशनल तैयारियों की अंतिम जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है।
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लेफ्टिनेंट जनरल (Lt. General): 3-स्टार अधिकारी, जो सेना की कोर (Corps) और कमान संभालते हैं तथा बड़े अभियानों व रणनीतिक तैयारियों की निगरानी करते हैं।
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मेजर जनरल (Major General): 2-स्टार अधिकारी, जो करीब 10,000 से 15,000 सैनिकों वाली सैन्य डिवीजन का नेतृत्व करते हैं।
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ब्रिगेडियर (Brigadier): 1-स्टार अधिकारी, जो कई सैन्य यूनिटों से मिलकर बनी ब्रिगेड की कमान संभालते हैं।
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कर्नल (Colonel): बटालियन या यूनिट का प्रशासनिक व ऑपरेशनल नेतृत्व करते हैं।
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लेफ्टिनेंट कर्नल (Lt. Colonel): 600 से 900 सैनिकों वाली बटालियन के उप-कमान या कमान में सैनिकों की ट्रेनिंग व तैयारी देखते हैं।
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मेजर (Major): ऑपरेशन की योजना बनाने, सैनिकों के प्रशिक्षण, प्रशासन और रसद (लॉजिस्टिक्स) व्यवस्था का जिम्मा संभालते हैं।
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कैप्टन (Captain): 100 से 150 जवानों वाली कंपनी के ऑपरेशंस और रणनीतिक नेतृत्व का दायित्व निभाते हैं।
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लेफ्टिनेंट (Lieutenant): कमीशन प्राप्त करने के बाद पहली रैंक, जो 30 से 40 सैनिकों की टुकड़ी (प्लाटून) का नेतृत्व करते हैं।